परिस्थितियां विपरीत हो या अनुकूल , अवसर हमेशा मौजूद होते हैं , उन्हें खोज निकलना आप पर निर्भर करता है।
एक व्यक्ति ने उस दौर में चाय का कारोबार शुरू किया जब चाय का प्रचलन बहुत सिमित था। कुछ समय बाद कंपनी नुकसान में आ गयी.
फिर भी व्यापारी ने हिम्मत नही हारी और कारोबार जारी रखा. अब वह और भी मेहनत करने लगा और कारोबार फ़ैलाने के लिए चाय कि पेटिया दूसरे देशो में भी ले जाने लगा।
एक बार इसी सिलसिले में वह जहाज में चाय की पेटिया रख कर दूसरे देश ले जा रहा था. रास्ते में जहाज खराब हो गया. स्थति को देखते हुए जहाज के कैप्टन ने घोसणा की कि सभी यात्री अपना सामान समुन्द्र में फेक दे. घोसणा सुन कर व्यापारी बुरी तरह हतोस्ताहित गया, वह जनता था की अगर उसने पेटिया समुन्द्र में फेक दी तो वह बर्बाद हो जाएगा।
उधर सब लोग अपनी जान बचने के लिए सामान समुन्द्र में खेकने लगे. अब व्यापारी के पास दूसरा कोई विकल्प नही बचा था. इसी चिंतन के बीच उसके दिमाग में एक विचार आया. अचानक वह उठा और जल्दी जल्दी चाय की पेटियो पर अपनी कंपनी का नाम लिखने लगा और साथ में यह सन्देश "यह चाय पिए". इस भाव के साथ की पेटिया लहरो के साथ बहकर दूसरे देश जाएेंगी यहाँ समुन्द्र के आस पास के लोग उसे जानने लगेंगे, उसने एक एक कर सारी पेटिया समुन्द्र के हवाले कर दी. कुछ समय बाद जहाज शकुसल विपदा से बहार निकल आया. जहाज के लंदन पहुँचते ही व्यापारी ने घटना का आँखों देखा हाल एक कागज पर लिखा। घटना का पूरा ब्यौरा लिखकर, अपनी कंपनी के नाम के साथ उसमे वह कागज एक समाचार पत्र को सौप दिया। अगले दिन समाचार पत्र में यह न्यूज़ छपी. रिपोर्ट में यात्रियों की व्याकुलता और भय का बड़ा ही मार्मिक और सजीव चित्रण किया गया था. इसलिए रिपोर्ट को लोगो ने बड़ी दिलचस्पी से पड़ा. उस दिन के बाद लोग उसकी चाय की कंपनी को जानने लगे. इस समुन्द्र घटना से व्यापारी की चाय कंपनी को देश विदेश में काफी प्रशिधि और प्रतिष्ठा मिली। इसके चलते कंपनी एक साल के अंदर ही 1890 के दसक की सबसे बड़ी चाय कंपनी बन कर उभरी। आज भी यह कंपनी पुरे विश्व में सबसे बड़ी कम्पन्यियो में से एक है. यह घटना है थॉमस लिप्टन के जीवन की , जिन्होंने थॉमस जे. लिप्टन टी कंपनी की शुरुआत की थी।
एक व्यक्ति ने उस दौर में चाय का कारोबार शुरू किया जब चाय का प्रचलन बहुत सिमित था। कुछ समय बाद कंपनी नुकसान में आ गयी.
फिर भी व्यापारी ने हिम्मत नही हारी और कारोबार जारी रखा. अब वह और भी मेहनत करने लगा और कारोबार फ़ैलाने के लिए चाय कि पेटिया दूसरे देशो में भी ले जाने लगा।
एक बार इसी सिलसिले में वह जहाज में चाय की पेटिया रख कर दूसरे देश ले जा रहा था. रास्ते में जहाज खराब हो गया. स्थति को देखते हुए जहाज के कैप्टन ने घोसणा की कि सभी यात्री अपना सामान समुन्द्र में फेक दे. घोसणा सुन कर व्यापारी बुरी तरह हतोस्ताहित गया, वह जनता था की अगर उसने पेटिया समुन्द्र में फेक दी तो वह बर्बाद हो जाएगा।
उधर सब लोग अपनी जान बचने के लिए सामान समुन्द्र में खेकने लगे. अब व्यापारी के पास दूसरा कोई विकल्प नही बचा था. इसी चिंतन के बीच उसके दिमाग में एक विचार आया. अचानक वह उठा और जल्दी जल्दी चाय की पेटियो पर अपनी कंपनी का नाम लिखने लगा और साथ में यह सन्देश "यह चाय पिए". इस भाव के साथ की पेटिया लहरो के साथ बहकर दूसरे देश जाएेंगी यहाँ समुन्द्र के आस पास के लोग उसे जानने लगेंगे, उसने एक एक कर सारी पेटिया समुन्द्र के हवाले कर दी. कुछ समय बाद जहाज शकुसल विपदा से बहार निकल आया. जहाज के लंदन पहुँचते ही व्यापारी ने घटना का आँखों देखा हाल एक कागज पर लिखा। घटना का पूरा ब्यौरा लिखकर, अपनी कंपनी के नाम के साथ उसमे वह कागज एक समाचार पत्र को सौप दिया। अगले दिन समाचार पत्र में यह न्यूज़ छपी. रिपोर्ट में यात्रियों की व्याकुलता और भय का बड़ा ही मार्मिक और सजीव चित्रण किया गया था. इसलिए रिपोर्ट को लोगो ने बड़ी दिलचस्पी से पड़ा. उस दिन के बाद लोग उसकी चाय की कंपनी को जानने लगे. इस समुन्द्र घटना से व्यापारी की चाय कंपनी को देश विदेश में काफी प्रशिधि और प्रतिष्ठा मिली। इसके चलते कंपनी एक साल के अंदर ही 1890 के दसक की सबसे बड़ी चाय कंपनी बन कर उभरी। आज भी यह कंपनी पुरे विश्व में सबसे बड़ी कम्पन्यियो में से एक है. यह घटना है थॉमस लिप्टन के जीवन की , जिन्होंने थॉमस जे. लिप्टन टी कंपनी की शुरुआत की थी।
0 comments:
Post a Comment