Sunday, 17 April 2016

What is essay? Explain in Hindi.

निबंध की इस श्रृंखला में चर्चा करेंगे लिखने के सही तरीके के बारे में।

दोस्तों निबंध की बेसिक बातों के लिए हम पहले ही कई पोस्ट लिख चुके हैं। आज हम आगे चर्चा करेंगे। हमारी कोशिश है कि बिल्कुल सरल शब्दों में आपको जटिल बातें सयझायी जांए।ताकि किसी तरह का कोई कन्फ्यूजन न रह जाए।क्योंकि हमारी टीम का मानना है कि जब कोई बात आपकी समझ में ठीक से आयेगी तभी आप उसे फालो भी करेंगे। वर्ना क्या फायदा? तो पिछले पोस्ट के प्रश्नों के उत्तर देते हैं - -

निबंध किसे कहते हैं? What is essay?

वैसे तो हिन्दी और अंग्रेजी के कई विद्वानों ने इस विधा को अपने ढंग से परिभाषित किया है लेकिन हमारा मकसद निबंध का इतिहास जानना नही है। इसलिए सीधे विषय पर फोकस करते हैं।
""निबंध एक ऐसी बंधन रहित रचना है जो स्वतंत्र रूप से किसी एक विषय के विभिन्न आयामों की चर्चा करती है।  ""Prose composition with a focused Subject of discussion. ""

2. निबंध की संरचना : किसी भी निबंध के तीन भाग होते हैं - -

  • a.प्रस्तावना - - इस भाग में प्रभावशाली तरीके से विषय का परिचय दिया जाता है जो कि संक्षिप्त, स्पष्ट, और सटीक होना चाहिए। इसे किसी कवि की पंक्तियाँ से शुरू कर सकते हैं।  First impression is the best impressions. 
  • b . वर्णन - यहां पर विषय के विभिन्न पहलुओं के सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों पहलुओं का क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुतीकरण किया जाता है। लफ्फाजीयों से दूर सिर्फ प्रासंगिक पहलुओं का समावेश होना चाहिए। लेखन में कसावट होनी चाहिए। पूरा निबंध बंधा होना चाहिए। 
  • c. निष्कर्ष--यहां पर सारी बातों का निचोड़ प्रस्तुत किया जाता है लेकिन ध्यान रहे किसी बात का दोहराव नही होना चाहिए। यह आशावादी, तार्किक और नये समाधान बतलाने वाला होना चाहिए। 


3. निबंध और लेख में अंतर--
निबंध विषय वस्तु के करीब रहता है। तथा उस पर गंभीर विश्लेषण करता है जबकि लेख मुद्दे के किसी विशेष पहलू का ही वर्णन करता है। यह एकपक्षीय होता है जबकि निबंध बहुपक्षीय संरचना होती है।

4. निबंध की भाषा शैली 
निबंध की भाषा अखबारों या मैग्जीन की तरह नही होनी चाहिए। तत्सम और आलंकारिक शब्दों का प्रयोग नही करना चाहिए। स्लैंग भी न प्रयोग करें। हिंग्लिश भी नही। सहज, सरल और विचारों को प्रभावी ढंग से रख पाने वाली भाषा प्रयोग करें। वाक्यों की संरचना व्याकरण की दृष्टि से ठीक होनी चाहिए। तभी वह परीक्षक को प्रभावित करेगी। विचारों का संयोजन बहुआयामी होना चाहिए।

5. निबंध लिखने के विषय का चयन 
चूंकि आपको मुख्य परीक्षा में अब 1200 - 1200
शब्दों के दो निबंध, दो विषयों पर लिखना है। इसलिए जिस विषय पर स्पष्ट समझ और पर्याप्त विषय वस्तु हो उसी पर लिखें। इसके लिए पहले से ही 4-5 क्षेत्र चुनकर उस पर सामग्री जुटाते रहें और अभ्यास भी करते रहें। किसी अजनबी विषय पर हीरोपंती नही दिखाना है वर्ना फेल होना तय है। 60 अंक भी नही मिलेगा जबकि आपको मेरिट में आने के लिए लाना है 160 अंक।

6. उत्कृष्ट निबंध के गुण : उत्कृष्टता के लिए निम्न गुण होने चाहिए।

  • संक्षिप्त, स्पष्ट और सारगर्भित हो। 
  • प्रासंगिक, प्रभावशाली और रचनात्मक हो। 
  • तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण हो। 
  • सामयिक सन्दर्भों से जुड़ाव हो। 
  • नये सवाल और नये जवाब शामिल हो। 
  • भाषा शैली सहज, सरल और सुन्दर हो। 
  • सभी सन्दर्भों का विश्लेषण हो। 

7. टापर्स के द्वारा निबंध पर दिये गये टिप्स 

  • लिखने से पहले ढांचा तैयार कर लें। 
  • क्या नही लिखना है। यह पहले ही तय कर लें। 
  • शब्द सीमा का पालन करें। 
  • जल्दबाजी में कोई पैरा अधूरा न छोड़ें 
  • प्रस्तावना और निष्कर्ष खूब ढंग से लिखें 
  • ज्यादा सूचनाएं न डालें, सिर्फ जरूरी 
  • किसी से तुलना न करें कि उसका ज्यादा अच्छा है। सिर्फ अपने पर फोकस करें 
  • तटस्थ रहे। पूर्वाग्रहों से मुक्त हो कर लिखें 

8. साहित्यक और सामान्य निबंध में अंतर 
चूंकि निबंध एक साहित्यिक विधा है। इसलिए कई अभ्यर्थी हिन्दी या अंग्रेजी की किताबों से निबंध के तत्व और भाग जानने के लिए उन्हें पढते हैं और जब परीक्षा हाल में जाते हैं तो वहीं उड़ेल कर चले आते हैं। जिनका विषय हिन्दी साहित्य होता है वो अपने विषयक पूर्वाग्रहों से मुक्त नही हो पाते और सब गड़बड़ कर देते हैं।

9. बाजारू निबंध संग्रहों का दुष्प्रभाव 
बाजार में सैकड़ों पब्लिकेशन का निबंध संग्रह है जिसे औसत दर्जे के छात्रों ने लिखा है। और ज्यादातर भाग कट कापी पेस्ट होता है। इनमें कोई शोध और मौलिकता नहीं होती। ये सिर्फ विषय का सतही प्रस्तुतीकरण करते हैं। अधिकांश अभ्यर्थी इन्ही निबंधों का अनुसरण और अनुकरण करते हैं। और धराशायी हो जाते हैं। आयोग को रटे रटाये निबंधों से शक्त चिढ़ है।
वो आपकी मौलिकता देखने का आकांक्षी है न कि दूसरे का जूठन देखना चाहता है।


10. निबंध का अभ्यास कैसे करें? 
सबसे पहले तो एक मोटी कापी खरीद लो और जो भी विषय पढो उस पर प्वाइंट बनाने के आदत का विकास करो। फिर उन प्वाइंट को इस्तेमाल करते हुए यह सोंचो की यदि इस पर निबंध आ गया तो मै किस तरह विस्तार और संक्षिप्तीकरण करूंगा। इससे विषय की नापतौल करने की समझ बढेगी जिसका फायदा मुख्य परीक्षा के हर पेपर में मिलेगा।

11. निबंध पर परीक्षक का दृष्टिकोण 
आयोग के परीक्षक बहुत अनुभवी होते हैं।वर्षों से उन्हें कापी जांचने और व्यक्तियों के चरित्र के मूल्यांकन का अनुभव होता है। वे कापी देखते ही समझ जाते हैं कि अभ्यर्थी को विषय की कितनी समझ है। इसलिए उसे बरगलाने के लिए पन्ने न भरें वर्ना नाराज होकर 0 भी दे सकता है। यदि उसे आपका लिखा निबंध पसंद आ गया तो 180 अंक भी दे सकता है।

12.निबंध का महत्व 
क्या आपने कभी सोचा है कि आयोग ने निबंध का पेपर क्यों रखा है? क्योंकि वह जानता है कि यही तरीका है किसी अभ्यर्थी की अप्रत्यक्ष रूप से खूबियों और खामियों को जानने का। आप जो लिखते हैं उससे आपकी सोंच और समझ का अंदाजा लग जाता है। इसलिए निबंध लेखन को
""Indirect Interview "" भी कहा जाता है।


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