Thursday, 14 May 2015

Who is Mahadevi Verma? Know In Hindi.

महादेवी वर्मा
Born: March 26, 1, 9, 07
Farrukhabad, Uttar Pradesh, India
Death September 11, 1, 9, 87
इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
कार्यक्षेत्र: अध्यापक, लेखक
राष्ट्रीयता: भारतीय
भाषा: हिन्दी
काल: आधुनिक काल
विधा: गद्य और पद्य
विषय: गीत, रेखाचित्र, संस्मरण व निबंध
साहित्यिक
आन्दोलन: छायावाद व
रहस्यवाद
प्रमुख कृति(याँ): यामा कविता संग्रह
===================================================
महादेवी वर्मा (२६ मार्च, १९०७ — ११ सितंबर, १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है। महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी। वे उन कवियों में से एक हैं जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की। न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे। उन्होंने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और शृंगार से सजाया कि दीपशिखा में वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई और उसने केवल पाठकों को ही नहीं समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया।
उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी की कविता में उस कोमल शब्दावली का विकास किया जो अभी तक केवल बृजभाषा में ही संभव मानी जाती थी। इसके लिए उन्होंने अपने समय के अनुकूल संस्कृत और बांग्ला के कोमल शब्दों को चुनकर हिन्दी का जामा पहनाया। संगीत की जानकार होने के कारण उनके गीतों का नाद-सौंदर्य और पैनी उक्तियों की व्यंजना शैली अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन की शुरूआत की और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ-साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। भारत के साहित्य आकाश में महादेवी वर्मा का नाम ध्रुव तारे की भांति प्रकाशमान है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर पूजनीय बनी रहीं। वर्ष २००७ उनकी जन्म शताब्दी के रूप में मनाया गया।

What is Khariboli? Explain in hindi.

खड़ीबोली
====================================================
खड़ी बोली से तात्पर्य खड़ी बोली हिंदी से है जिसे भारतीय संविधान ने राजभाषा के रूप में स्वीकृत किया है। भाषाविज्ञान की दृष्टि से इसे आदर्श (स्टैंडर्ड) हिंदी, उर्दू तथा हिंदुस्तानी की मूल आधार स्वरूप बोली होने का गौरव प्राप्त है। खड़ी बोली पश्चिम रुहेलखंड, गंगा के उत्तरी दोआब तथा अंबाला जिले की उपभाषा है जो ग्रामीण जनता के द्वारा मातृभाषा के रूप में बोली जाती है। इस प्रदेश में रामपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, सहारनपुर, देहरादून का मैदानी भाग, अंबाला तथा कलसिया और भूतपूर्व पटियाला रियासत के पूर्वी भाग आते हैं।
खड़ी बोली वह बोली है जिसपर ब्रजभाषा या अवधी आदि की छाप न हो। ठेंठ हिंदी। आज की राष्ट्रभाषा हिंदी का पूर्व रूप। इसका इतिहास शताब्दियों से चला आ रहा है। यह परिनिष्ठित पश्चिमी हिंदी का एक रूप है।
====================================================
परिचय-------
'खड़ी बोली' (या खरी बोली) वर्तमान हिंदी का एक रूप है जिसमें संस्कृत के शब्दों की बहुलता करके वर्तमान हिंदी भाषा की सृष्टि की गई और फारसी तथा अरबी के शब्दों की अधिकता करके वर्तमान उर्दू भाषा की सृष्टि की गई है। दूसरे शब्दों में, वह बोली जिसपर ब्रज या अवधी आदि की छाप न हो, ठेंठ हिंदीं। खड़ी बोली आज की राष्ट्रभाषा हिंदी का पूर्व रूप है। यह परिनिष्ठित पश्चिमी हिंदी का एक रूप है। इसका इतिहास शताब्दियों से चला आ रहा है।
जिस समय मुसलमान इस देश में आकर बस गए, उस समय उन्हें यहाँ की कोई एक भाषा ग्रहण करने की आवश्यकता हुई। वे प्रायः दिल्ली और उसके पूरबी प्रांतों में ही अधिकता से बसे थे और ब्रजभाष तथा अवधी भाषाएँ, क्लिष्ट होने के कारण अपना नहीं सकते थे, इसलिये उन्होंने मेरठ और उसके आसपास की बोली ग्रहण की और उसका नाम खड़ी (खरी?) बोली रखा। इसी खड़ी बोली में वे धीरे धीरे फारसी और अरबी शब्द मिलाते गए जिससे अंत में वर्तमान उर्दू भाषा की सृष्टि हुई। विक्रमी १४वीं शताब्दी मे पहले-पहल अमीर खुसरो ने इस प्रांतीय बोली का प्रयोग करना आरंभ किया और उसमें बहुत कुछ कविता की, जो सरल तथा सरस होने के कारण शीघ्र ही प्रचलित हो गई। बहुत दिनों तक मुसलमान ही इस बोली का बोलचाल और साहित्य में व्यवहार करते रहे, पर पीछे हिंदुओं में भी इसका प्रचार होने लगा। १५वीं और १६ वीं शताब्दी में कोई कोई हिंदी के कवि भी अपनी कविता में कहीं कहीं इसका प्रयोग करने लगे थे, पर उनकी संख्या प्रायः नहीं के समान थी। अधिकांश कविता बराबर अवधी और व्रजभाषा में ही होती रही। १८वीं शताव्धी में हिंदू भी साहित्य में इसका व्यवहार करने लगे, पर पद्य में नहीं, केवल गद्य में; और तभी से मानों वर्तमान हिंदी गद्य का जन्म हुआ, जिसके आचार्य मुंशी सदासुखलाल, लल्लू जी लाल और सदल मिश्र माने जाते हैं। जिस प्रकार मुसलमानों ने इसमें फारसी तथा अरबी आदि के शब्द भरकर वर्तमान उर्दू भाषा बनाई, उसी प्रकार हिंदुओं ने भी उसमें संस्कृत के शब्दों की अधिकता करके वर्तमान हिंदी प्रस्तुत की। इधर थोड़े दिनों से कुछ लोग संस्कृतप्रचुर वर्तमान हिंदी में भी कविता करने लग गए हैं और कविता के काम के लिये उसी को खड़ी बोली कहते हैं।
वर्तमान हिंदी का एक रूप जिसमें संस्कृत के शब्दों की बहुलता करके वर्तमान हिंदी भाषा की और फारसी तथा अरबी के शब्दों की अधिकता करके वर्तमान उर्दू भाषा की सृष्टि की गई है।

Know Amir Khosrow in hindi

अमीर ख़ुसरो
Born in 1253
Patiyali, Etah, Uttar Pradesh, India
Death 1325
शैली(यां) गज़ल, खयाल, कव्वाली, रुबाई, तराना
व्यवसाय संगीतज्ञ, कवि
===================================================
अबुल हसन अमीर ख़ुसरु चौदहवीं सदी के आसपास दिल्ली के पास रहने वाले एक प्रमुख कवि (शायर), गायक और संगीतकार थे। खुसरो को हिन्दी खड़ीबोली का पहला लोकप्रिय कवि माना जाता है। वे अपनी पहेलियों और मुकरियों के लिए जाने जाते हैं। सबसे पहले उन्हीं ने हिन्दी भाषा (हिन्दवी) का उल्लेख किया था। वे फारसी के कवि भी थे। उनको दिल्ली सल्तनत का आश्रय मिला हुआ था। उनके ग्रंथो की सूची लम्बी है। साथ ही इनका इतिहास स्रोत रूप में महत्त्व है।
मध्य एशिया की लाचन जाति के तुर्क सैफुद्दीन के पुत्र अमीर खुसरो का जन्म सन् (६५२ हि.) में एटा उत्तर प्रदेश के पटियाली नामक कस्बे में हुआ था। लाचन जाति के तुर्क चंगेज खाँ के आक्रमणों से पीड़ित होकर बलवन (१२६६ -१२८६ ई0) के राज्यकाल में ‘’शरणार्थी के रूप में भारत में आ बसे थे। खुसरो की माँ बलबन के युद्धमंत्री इमादुतुल मुलक की लड़की, एक भारतीय मुसलमान महिला थी। सात वर्ष की अवस्था में खुसरो के पिता का देहान्त हो गया। किशोरावस्था में उन्होंने कविता लिखना प्रारम्भ किया और २० वर्ष के होते होते वे कवि के रूप में प्रसिद्ध हो गएं। खुसरो में व्यवहारिक बुद्धि की कमी नहीं थी। सामाजिक जीवन की खुसरो ने कभी अवहेलना नहीं की। खुसरो ने अपना सारा जीवन राज्याश्रय में ही बिताया। राजदरबार में रहते हुए भी खुसरो हमेशा कवि, कलाकार, संगीतज्ञ और सेनिक ही बने रहे।
भारतीय गायन में क़व्वाली और सितार को इन्हीं की देन माना जाता है। इन्होंने गीत की तर्ज पर फ़ारसी में और अरबी ग़जल के शब्दों को मिलाकर कई पहेलियाँ और दोहे लिखे।
===================================================
जीवन
इनके तीन पुत्रों में अबुलहसन (अमीर खुसरो) सबसे बड़े थे - ४ बरस की उम्र में वे दिल्ली लाए गए। ८ बरस की उम्र में वे प्रसिद्ध सूफ़ी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य बने। १६-१७ साल की उम्र में वे अमीरों के घर शायरी पढ़ने लगे थे। एक बार दिल्ली के एक मुशायरे में बलबन के भतीजे सुल्तान मुहम्मद को ख़ुसरो की शायरी बहुत पसंद आई और वो इन्हें अपने साथ मुल्तान (आधुनिक पाकिस्तानी पंजाब) ले गया। सुल्तान मुहम्मद ख़ुद भी एक अच्छा शायर था - उसने खुसरो को एक अच्छा ओहदा दिया। मसनवी लिखवाई जिसमें २० हज़ार शेर थे - ध्यान रहे कि इसी समय मध्यतुर्की में शायद दुनिया के आजतक के सबसे श्रेष्ठ शायर मौलाना रूमी भी एक मसनवी लिख रहे थे या लिख चुके थे। ५ साल तक मुल्तान में उनका जिंदगी बहुत ऐशो आराम से गुज़री। इसी समय मुग़लों का एक ख़ेमा पंजाब पर आक्रमण कर रहा था। इनको क़ैद कर हेरात ले जाया गया - मुग़लो ने सुल्तान मुहम्मद का सर कलम कर दिया था। दो साल के बाद इनकी सैनिक आकांक्षा की कमी को देखकर और शायरी का अंदाज़ देखकर छोड़ दिया गया। फिर यो पटियाली पहुँचे और फिर दिल्ली आए। बलबन को सारा क़िस्सा सुनाया - बलबन भी बीमार पड़ गया और फिर मर गया। फिर कैकुबाद के दरबार में भी ये रहे - वो भी इनकी शायरी से बहुत प्रसन्न रहा और इन्हे मुलुकशुअरा (राष्ट्रकवि) घोषित किया। जलालुद्दीन खिलजी इसी वक़्त दिल्ली पर आक्रमण कर सत्ता पर काबिज़ हुआ। उसने भी इनको स्थाई स्थान दिया। जब खिलजी के भतीजे और दामाद अलाउद्दीन ने ७० वर्षीय जलालुद्दीन का क़त्ल कर सत्ता हथियाई तो भी वो अमीर खुसरो को दरबार में रखा। चित्तौड़ पर चढ़ाई के समय भी अमीर खुसरो ने अलाउद्दान को मना किया लेकिन वो नहीं माना। इसके बाद मलिक काफ़ूर ने अलाउद्दीन से सत्ता हथियाई और मुबारक शाह ने मलिक काफ़ूर से।

Know Hazrat Nizamuddin Auliya in hindi

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया
====================================================
हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया (1236-1325) चिश्ती घराने के चौथे संत थे। इस सूफी संत ने वैराग्य और सहनशीलता की मिसाल पेश की, कहा जाता है कि 1303 में इनके कहने पर मुगल सेना ने हमला रोक दिया था, इस प्रकार ये सभी धर्मों के लोगों में लोकप्रिय बन गए। हजरत साहब ने 92 वर्ष की आयु में प्राण त्यागे और उसी वर्ष उनके मकबरे का निर्माण आरंभ हो गया, किंतु इसका नवीनीकरण 1562 तक होता रहा। दरगाह में संगमरमर पत्थर से बना एक छोटा वर्गाकार कक्ष है, इसके संगमरमरी गुंबद पर काले रंग की लकीरें हैं। मकबरा चारों ओर से मदर ऑफ पर्ल केनॉपी और मेहराबों से घिरा है, जो झिलमिलाती चादरों से ढकी रहती हैं। यह इस्लामिक वास्तुकला का एक विशुद्ध उदाहरण है। दरगाह में प्रवेश करते समय सिर और कंधे ढके रखना अनिवार्य है। धार्मिक गीत और संगीत इबादत की सूफी परंपरा का अटूट हिस्सा हैं। दरगाह में जाने के लिए सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच का समय सर्वश्रेष्ठ है, विशेषकर सोमवार को, मुस्लिम अवकाशों और त्यौहार के दिनों में यहां भीड़ रहती है। इन अवसरों पर कव्वाल अपने गायन से श्रद्धालुओं को धार्मिक उन्माद से भर देते हैं। यह दरगाह निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन के नजदीक मथुरा रोड से थोड़ी दूरी पर स्थित है। यहां दुकानों पर फूल, लोहबान, टोपियां आदि मिल जाती हैं।
संत होने के साथ साथ वे उच्चकोटि के कवि भी थे। उनके लिखे होली और फाग आम लोगों में आज भी लोकप्रिय हैं। अमीर खुसरो, हज़रत निजामुद्दीन के सबसे प्रसिद्ध शिष्य थे, जिनका प्रथम उर्दू शायर तथा उत्तर भारत में प्रचलित शास्त्रीय संगीत की एक विधा ख़याल के जनक के रूप में सम्मान किया जाता है। खुसरो का लाल पत्थर से बना मकबरा उनके गुरु के मकबरे के सामने ही स्थित है। इसलिए हजरत निज़ामुद्दीन और अमीर खुसरो की बरसी पर दरगाह में दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण उर्स (मेले) आयोजित किए जाते हैं।
====================================================
जीवन की प्रमुख घटनाएं
उनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने दिल्ली के सात सुल्तानॉ का शासन देखा था लेकिन कभी किसी के दरबार मे नही गये थे ना ही सुल्तान को अपने यहाँ आने देते थे, यदि आता तो वे दूसरे रास्ते से घर से निकल जाते थे। उन्होंने गयासुद्दीन तुगलक से कहा था हुनूज दिल्ली दूरस्त और वो दिल्ली लौटने से पहले ही मर गया था।

Know Maulana Muhammad Jalaluddin Rumi In Hindi

मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी
========================================
मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी फारसी साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक थे जिन्होंने मसनवी में महत्वपूर्ण योगदान किया। इन्होंने सूफ़ी परंपरा में नर्तक साधुओ (गिर्दानी दरवेशों) की परंपरा का संवर्धन किया। रूमी अफ़ग़ानिस्तान के मूल निवासी थे पर मध्य तुर्की के सल्जूक दरबार में इन्होंने अपना जीवन बिताया और कई महत्वपूर्ण रचनाएँ रचीं। कोन्या (मध्य तुर्की) में ही इनका देहांत हुआ जिसके बाद आपकी कब्र एक मज़ार का रूप लेती गई जहाँ आपकी याद में सालाना आयोजन सैकड़ों सालों से होते आते रहे हैं।
रूमी के जीवन में शम्स तबरीज़ी का महत्वपूर्ण स्थान है जिनसे मिलने के बाद इनकी शायरी में मस्ताना रंग भर आया था। इनकी रचनाओं के एक संग्रह (दीवान) को दीवान-ए-शम्स कहते हैं।
====================================================
जीवनी
इनका जन्म फारस देश के प्रसिद्ध नगर बाल्ख़ में सन् ३०४ हिजरी में हुआ था। रूमी के पिता शेख बहाउद्दीन अपने समय के अद्वितीय पंडित थे जिनके उपदेश सुनने और फतवे लेने फारस के बड़े-बड़े अमीर और विद्वान् आया करते थे। एक बार किसी मामले में सम्राट् से मतभेद होने के कारण उन्होंने बलख नगर छोड़ दिया। तीन सौ विद्वान मुरीदों के साथ वे बलख से रवाना हुए। जहां कहीं वे गए, लोगों ने उसका हृदय से स्वागत किया और उनके उपदेशों से लाभ उठाया। यात्रा करते हुए सन् ६१० हिजरी में वे नेशांपुर नामक नगर में पहुंचे। वहां के प्रसिद्ध विद्वान् ख्वाजा फरीदउद्दीन अत्तार उनसे मिलने आए। उस समय बालक जलालुद्दीन की उम्र ६ वर्ष की थी। ख्वाजा अत्तार ने जब उन्हें देखा तो बहुत खुश हुए और उसके पिता से कहा, "यह बालक एक दिन अवश्य महान पुरुष होगा। इसकी शिक्षा और देख-रेख में कमी न करना।" ख्वाजा अत्तार ने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ मसनवी अत्तार की एक प्रति भी बालक रूमी को भेंट की।
वहां से भ्रमण करते हुए वे बगदाद पहुंचे और कुछ दिन वहां रहे। फिर वहां से हजाज़ और शाम होते हुए लाइन्दा पहुंचे। १८ वर्ष की उम्र में रूमी का विवाह एक प्रतिष्ठित कुल की कन्या से हुआ। इसी दौरान बादशाह ख्व़ाजरज़मशाह का देहान्त हो गया और शाह अलाउद्दीन कैकबाद राजसिंहासन पर बैठे। उन्होंने अपने कर्मचारी भेजकर शेख बहाउद्दीन से वापस आने की प्रार्थना की। सन् ६२४ हिजरी में वह अपने पुत्र सहित क़ौनिया गए और चार वर्ष तक यहां रहे। सन ६२८ हिजरी में उनका देहान्त हो गया।
रूमी अपने पिता के जीवनकाल से उनके विद्वान शिष्य सैयद बरहानउद्दीन से पढ़ा करते थे। पिता की मृत्यु के बाद वह दमिश्क और हलब के विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए चले गये और लगभग १५ वर्ष बाद वापस लौटे। उस समय उनकी उम्र चालीस वर्ष की हो गयी थी। तब तक रूमी की विद्वत्ता और सदाचार की इतनी प्रसिद्ध हो गयी थी कि देश-देशान्तरों से लोग उनके दर्शन करने और उपदेश सुनने आया करते थे। रूमी भी रात-दिन लोगों को सन्मार्ग दिखाने और उपदेश देने में लगे रहते। इसी अर्से में उनकी भेंट विख्यात साधू शम्स तबरेज़ से हुई जिन्होंने रूमी को अध्यात्म-विद्या की शिक्षा दी और उसके गुप्त रहस्य बतलाये। रूमी पर उनकी शिखाओं का ऐसा प्रभाव पड़ा कि रात-दिन आत्मचिन्तन और साधना में संलग्न रहने लगे। उपदेश, फतवे ओर पढ़ने-पढ़ाने का सब काम बन्द कर दिया। जब उनके भक्तों और शिष्यों ने यह हालत देखी तो उन्हें सन्देह हुआ कि शम्स तबरेज़ ने रूमी पर जादू कर दिया है। इसलिए वे शम्स तबरेज़ के विरुद्ध हो गये और उनका वध कर डाला। इस दुष्कृत्य में रूमी के छोटे बेटे इलाउद्दीन मुहम्मद का भी हाथ था। इस हत्या से सारे देश में शोक छा गया और हत्यारों के प्रति रोष और घृणा प्रकट की गयी। रूमी को इस दुर्घटना से ऐसा दु:ख हुआ कि वे संसार से विरक्त हो गये और एकान्तवास करने लगे। इसी समय उन्होंने अपने प्रिय शिष्य मौलाना हसामउद्दीन चिश्ती के आग्रह पर 'मसनवी' की रचना शुरू की। कुछ दिन बाद वह बीमार हो गये और फिर स्वस्थ नहीं हो सके। ६७२ हिजरी में उनका देहान्त हो गया। उस समय वे ६८ वर्ष के थे। उनकी मज़ार क़ौनिया में बनी हुई है।

Know indian constitution in HIndi

भारतीय संविधान
====================================================
भारत, संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक प्रभुसत्तासम्पन्न, समाजवादी धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है। यह गणराज्य भारत के संविधान के अनुसार शासित है। भारत का संविधान संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
====================================================
संक्षिप्त परिचय
भारत का संविधान दुनिया का सबसे बडा लिखित संविधान है। इसमें अब 450 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं। संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद् राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रमुख प्रधान मंत्री होगा, राष्‍ट्रपति इस मंत्रिपरिषद् की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं।
मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्‍येक राज्‍य में एक विधान सभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधान परिषद् कहा जाता है। राज्‍यपाल राज्‍य का प्रमुख है। प्रत्‍येक राज्‍य का एक राज्‍यपाल होगा तथा राज्‍य की कार्यकारी शक्ति उसमें विहित होगी। मंत्रिपरिषद्, जिसका प्रमुख मुख्‍य मंत्री है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है। राज्‍य की मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्‍य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष्‍ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्‍द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्‍य क्षेत्र कहा जाता है।

Wednesday, 13 May 2015

Know Indian Flag in Hindi

Indian flag (Tiranga) and its history in Hindi. Small notes on Indian Flag.

भारत का ध्वज --------
===================================================
भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी। इसे १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व २२ जुलाई, १९४७ को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था। इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात २:३ है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है जिसमें २४ अरे होते हैं। इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है व रूप सम्राट अशोक की राजधानी सारनाथ में स्थित स्तंभ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह होता है।
सरकारी झंडा निर्दिष्टीकरण के अनुसार झंडा खादीमें ही बनना चाहिए। यह एक विशेष प्रकार से हाथ से काते गए कपड़े से बनता है जो महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय बनाया था। इन सभी विशिष्टताओं को व्यापक रूप से भारत में सम्मान दिया जाता हैं भारतीय ध्वज संहिता के द्वारा इसके प्रदर्शन और प्रयोग पर विशेष नियंत्रण है। ध्वज का हेराल्डिक वर्णन इस प्रकार से होता है:
====================================================
परिचय ----------
गांधी जी ने सबसे पहले 1921 में कांग्रेस के अपने झंडे की बात की थी। इस झंडे को पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। इसमें दो रंग थे लाल रंग हिन्दुओं के लिए और हरा रंग मुस्लिमों के लिए। बीच में एक चक्र था। बाद में इसमें अन्य धर्मो के लिए सफेद रंग जोड़ा गया। स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ दिन पहले संविधान सभा ने राष्ट्रध्वज को संशोधित किया। इसमें चरखे की जगह अशोक चक्र ने ली। इस नए झंडे की देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने फिर से व्याख्या की।
21 फीट गुणा 14 फीट के झंडे पूरे देश में केवल तीन किलों के ऊपर फहराए जाते हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित किला उनमें से एक है। इसके अतरिक्त कर्नाटक का नारगुंड किले और महाराष्ट्र का पनहाला किले पर भी सबसे लम्बे झंडे को फहराया जाता है।
1951 में पहली बार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने पहली बार राष्ट्रध्वज के लिए कुछ नियम तय किए। 1968 में तिरंगा निर्माण के मानक तय किए गए। ये नियम अत्यंत कड़े हैं। केवल खादी या हाथ से काता गया कपड़ा ही झंडा बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। कपड़ा बुनने से लेकर झंडा बनने तक की प्रक्रिया में कई बार इसकी टेस्टिंग की जाती है। झंडा बनाने के लिए दो तरह की खादी का प्रयोग किया जाता है। एक वह खादी जिससे कपड़ा बनता है और दूसरा खादी-टाट। खादी के केवल कपास, रेशम और ऊन का प्रयोग किया जाता है। यहां तक की इसकी बुनाई भी सामन्य बुनाई से भिन्न होती है। ये बुनाई बेहद दुर्लभ होती है। इसे केवल पूरे देश के एक दर्जन से भी कम लोग जानते हैं। धारवाण के निकट गदग और कर्नाटक के बागलकोट में ही खादी की बुनाई की जाती है। जबकी '''हुबली''' एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जहां से झंडा उत्पादन व आपूर्ति की जाती है| बुनाई से लेकर बाजार में पहुंचने तक कई बार बीआईएस प्रयोगशालाओं में इसका परीक्षण होता है। बुनाई के बाद सामग्री को परीक्षण के लिए भेजा जाता है। कड़े गुणवत्ता परीक्षण के बाद उसे वापस कारखाने भेज दिया जाता है। इसके बाद उसे तीन रंगो में रंगा जाता है। केंद्र में अशोक चक्र को काढ़ा जाता है। उसके बाद इसे फिर परीक्षण के लिए भेजा जाता है। बीआईएस झंडे की जांच करता है इसके बाद ही इसे बाजार में बेचने के लिए भेजा जाता है।

Tata Institute of Fundamental Research

Know Tata Institute of Fundamental Research,(TIFR) In Hindi
===================================================
विक्रम अंबालाल साराभाई (१२ अगस्त, १९१९- ३0 दिसंबर, १९७१) भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने ८६ वैज्ञानिक शोध पत्र लिखा एवं ४० संस्थान खोला। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन १९६६ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
डॉ॰ विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।
===================================================
इतिहास ---------------
सन् १९४९ में होमी जहांगीर भाभा जिन्हें भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में उनके योगदान के लिए जाना जाता है ने एक वैज्ञानिक शौध संस्थान स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता का अनुरोध करते हुए सर दोरबजी टाटा ट्रस्ट को लिखा।
===================================================
अनुसंधान के क्षेत्र -------
यहां रसायन विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर विज्ञान, जन-स्वास्थ्य, जीव विज्ञान, भौतिकी तथा विज्ञान शिक्षण में शोध कार्य किया जाता है।
इस संस्थान के शोध को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है-
गणित का विद्यालय
प्राकृतिक विज्ञानों का विद्यालय
तकनिकी एवं कम्प्यूटर विज्ञान का विद्यालय
===================================================
संबद्ध अनुसंधान संस्थाएँ -------
टी आई एफ आर से सम्बद्ध कुछ शोध संस्थाएं इसके कोलाबा (मुम्बई) स्थित मुख्य परिसर के बाहर भी स्थित हैं-
होमी भाभा विज्ञान शिक्षण केन्द्र - देवनार, मुम्बई
राष्ट्रीय रेडियो खगोल-भौतिकी केन्द्र - पुणे
राष्ट्रीय जीव वैज्ञानिक केन्द्र - बंगलुरू
टी आई एफ आर केन्द्र - बंगलुरू, गणित के लिये

The National Centre for Radio Astrophysics

Know about The National Centre for Radio Astrophysics In hindi.

राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्द्र स्थापित
प्रकार: अनुसंधान संस्थान
निदेशक: स्वर्ण कांति घोष
स्थिति: पुणे, भारत
परिसर: शहरी
सम्बन्धन: टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
===================================================
भारत का राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केन्द्र (एन सी आर ए), पुणे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है। यह टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान का ही एक भाग है। खोदाद में, पुणे से ८० कि.मी दूर, वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप (जी एम आर टी), विश्व का सबसे बड़ा रेडियो दूरदर्शी निर्माण एवं स्थापित किया है। यह मीटर तरंगदैर्घ्य पर संचालित है। इसमें ३० पूर्णतया घुमाने लायक डिश लगी हैं, जो कि परस्पर ४५ मीटर की दूरियों पर लगी हुई हैं। एवं पूरी स्थापना २५ कि.मी. के क्षेत्र में फैली हुई है।

Tuesday, 12 May 2015

What is PHD? Explain in Hindi.

पीएचडी
===================================================
डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Doctor of Philosophy), या संक्षेप में पीएचडी (PhD या Ph.D.) विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदत्त उच्च शैक्षिक डिग्री है। किसी को प्रदान की जाने वाली यह प्राय: सर्वोच्च शैक्षिक डिग्री है।
===================================================
पीएचडी एक उन्नत शैक्षणिक डिग्री है। जिसे विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित किया गया है। अधिकांश अंग्रेजी बोलने वाले देशों में, पीएचडी सर्वोच्च डिग्री है जिसे अ र्जित किया जा सकता है (जैसे हालांकि कुछ देशों में ब्रिटेन, आयरलैंड और राष्ट्रमंडल देश कानून और चिकित्सा के उच्च doctorates से सम्मानित कर रहे हैं )। पीएचडी या समकक्ष डिग्री के रूप में एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर या शोधकर्ता के रूप में कैरियर की शुरुआत के लिए एक आवश्यकता बन गई है।
===================================================
इतिहास ------------
वेलिंगटन, Bathmaker, हंट, McCullough एवं Sikes (२००५) के अनुसार पहली पीएचडी डिग्री सन् 1150 में पेरिस में प्रदान की गयी।
==================================================

Know about Higher Education in Hindi

उच्च शिक्षा
====================================================
उच्च शिक्षा (higher education) उच्च शिक्षा का अर्थ है सामान्य रूप से सबको दी जानेवाली शिक्षा से ऊपर किसी विशेष विषय या विषयों में विशेष, विशद तथा शूक्ष्म शिक्षा। यह शिक्षा के उस स्तर का नाम है जो विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक विश्वविद्यालयों, कम्युनिटी महाविद्यालयों, लिबरल आर्ट कालेजों एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों आदि के द्वारा दी जाती है। प्राथमिक एवं माध्यमिक के बाद यह शिक्षा का तृतीय स्तर है जो प्राय: ऐच्छिक (non-compulsory) होता है। इसके अन्तर्गत स्नातक, परास्नातक (postgraduate education) एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण आदि आते हैं।

What is Liberal education ?

उदार शिक्षा (Liberal education)
===================================================
उदार शिक्षा (Liberal education) मध्ययुग के 'उदार कलाओं' की संकल्पना (कांसेप्ट) पर आधारित शिक्षा को कहते है। वर्तमान समय में 'ज्ञान युग' (Age of Enlightenment) के उदारतावाद पर आधारित शिक्षा को उदारशिक्षा कहते हैं। वस्तुतः ुदार शिक्षा' शिक्षा का दर्शन है जो व्यक्ति को विस्तृत ज्ञान, प्रदान करती है तथा इसके साथ मूल्य, आचरण, नागरिक दायित्वों का निर्वहन आदि सिखाती है। उदार शिक्षा प्रायः वैश्विक एवं बहुलतावादी दृष्टिकोण देती है।

Know Gateway of India In Hindi

गेटवे ऑफ़ इन्डिया
===================================================
गेटवे ऑफ़ इन्डिया भारत के प्रमुख नगर मुम्बई के दक्षिण में समुद्र तट पर स्थित है। यह प्रवेशद्वार असिताश्म का बना हुआ स्थापत्य है, जिसकी ऊंचाई २६ मीटर है। इस प्रवेशद्वार के पास ही पर्यटकों के समुद्र भ्रमण हेतु नौका-सेवा भी उपल्ब्ध है। प्रवेशद्वार को बनाने के लिए पीला असिताश्म प्रयुक्त किया गया है। प्रवेशद्वार का निर्माण राजा जॉर्ज पंचम और रानी मैरी के आगमन 2 दिसंबर, 1911 की यादगार में हुआ था। इसके वास्तुशिल्पी जॉजॅ विंटैट थे। यह सन् 1924 में बन कर तैयार हुआ।

Know Bombay Stock Exchange In Hindi

बंबई स्टॉक एक्सचेंज
===================================================
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत और एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना 1875 मे हुई थी। इस एक्सचेंज की पहुंच 417 शहरों तक है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारतीय शेयर बाज़ार के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है। दूसरा एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है। भारत को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजार में अपना श्रेष्ठ स्थान दिलाने में बीएसई की अहम भूमिका है।
एशिया के सबसे प्राचीन और देश के प्रथम स्टॉक एक्सचेंज को - बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सिक्युरिटीज कांट्रेक्ट रेग्युलेशन एक्ट 1956 के तहत स्थाई मान्यता मिली है।
इसका लक्ष्य है - 'वैश्विक कीर्ति की पताका फहराकर प्रमुख भारतीय स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरना'
===================================================
परिचय
एशिया के सबसे प्राचीन शेयर बाजार 'बीएसई' की स्थापना 1895 में लोकप्रिय `बाम्बे स्टाक एक्सचेंज' के रूप में हुई थी। भारतीय पूंजी बाजार के विकास में इस एक्सचेंज की व्यापक भूमिका रही है और इसका सूचकांक विश्वविख्यात है। मैनेजिंग डायरेक्टर के नेतृत्व में डायरेक्टर्स बोर्ड द्वारा एक्सचेंज का संचालन होता है। इस बोर्ड में प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स, ट्रेडिंग सदस्यों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक प्रतिनिधियों का समावेश है। एक्सचेंज भारत के छोटे - बड़े शहरों में अपनी उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। बीएसई की सिस्टम और प्रक्रिया ऐसी है कि बाजार की पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे। वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर, सर्वोच्च स्टाक एक्सचेंज के रूप में उभरने वाले इस एक्सचेंज के पास सवा सौ से अधिक वर्षों के भव्य इतिहास की समृद्ध विरासत है।
एक्सचेंज में `ट्रेडिंग राइट' और `ओनरशिप राइट' एक दूसरे से अलग है। ऐसी परिस्थिती में निवेशकों के हितों पर विशेष सावधानी बरती जाती है। एक्सचेंज इक्विटी, डेब्ट तथा प्युचर्स और ऑप्शन के व्यापार के लिए ढांचा एवं पारदर्शक ट्रेडिंग सिस्टम सुनिश्चित करता है। बीएसई की आनलाइन ट्रेडिंग प्रणाली बेहतरीन गुणवत्तावाली है। वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त इन्फार्मेशन सिक्युरिटी मैनेजमेंट सिस्टम का दर्जा BS 7799-2:2002 सर्टिफिकेट वाला है। BS 7799 ऑडिट डीएनवी (Det Norske Veritas) द्वारा किया गया था। यह प्रमाणपत्र प्राप्त करनेवाला बीएसई भारत का एकमात्र और विश्व का दूसरा एक्सचेंज है। जानकारी एकत्रित करने, जोखिम को नियंत्रित करने तथा तकनीकी प्रणाली और लोगों की सम्पत्ती की सुरक्षा के लिए BS 7799 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानक है।

Marine Drive in Mumbai

Know Marine Drive in Mumbai

मरीन ड्राइव मुंबई
====================================================
मरीन ड्राइव मुंबई में 1920 में निर्मित हुआ था। यह अरब सागर के किनारे-किनारे, नरीमन प्वाइंट पर सोसाइटी लाइब्रेरी और मुंबई राज्य सेंट्रल लाइब्रेरी से लेकर चौपाटी से होते हुए मालाबार हिल तक के क्षेत्र में है। मरीन ड्राइव के शानदार घुमाव पर लगी स्ट्रीट-लाइटें रात्रि के समय इस प्रकार जगमाती हैं कि इसे क्वीन्स नैकलेस का नाम दिया गया है। रात्रि के समय ऊंचे भवनों से देखने पर मरीन ड्राइव बहुत बेहतरीन दिखाई देता है।
====================================================

Satish Dhawan Space Centre In Hindi

Know All about Satish Dhawan Space Centre In Hindi.
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
===================================================
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का प्रक्षेपण केंद्र है। यह आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में स्थित है, इसे 'श्रीहरीकोटा रेंज' या 'श्रीहरीकोटा लाँचिंग रेंज' के नाम से भी जाना जाता है। 2002 में इसरो के पूर्व प्रबंधक और वैज्ञानिक सतीश धवन के मरणोपरांत उनके सम्मान में इसका नाम बदला गया।
===================================================
प्रक्षेपण यान की असेम्‍बली के लिए दूसरा भवन ----
केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 12 सितम्‍बर, 2013 को सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र, श्रीहरिकोटा में प्रक्षेपण यान की असेम्‍बली के लिए दूसरे भवन के निर्माण की मंजूरी दी। इस पर 363.95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी, जिसमें सात करोड़ रुपये का खर्च विदेशी मुद्रा में होगा। इस दूसरी बिल्डिंग के उपलब्‍ध हो जाने से पीएसएलवी और जीएसएलवी की प्रक्षेपण फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी। यह जीएसएलवी एमके-III के एकीकरण के लिए वर्तमान व्‍हीकल असेम्‍बली बिल्डिंग को अतिरिक्‍त सुविधा मुहैया करायेगी। तीसरे प्रक्षेपण पैड तथा भविष्‍य में सामान्‍य यान प्रक्षेपण के लिए भी इससे काफी सुविधा मिलेगी।

Sadabahar GK facts in HIndi Question Answer

1.एक बार साँस लेने की क्रिया में कितने सेकंड का समय लगता है-5सेकंड
2.मनुष्य का कशेरुदंड कितनी कशेरुकाओं से मिलकर बना होता है-33
3.मनुष्य के शरीर में कुल हड्डियों की संख्या होती है- 206
4.बाल्यवस्था में कुल हड्डियों कीसंख्या होती है-208
5.मनुष्य के सर में कुल हड्डियों की संख्या-29 है
6.अधिकांश उत्पादों पर प्रिंटर्स लाइन्स के पैटर्न को कहते हैं-बारकॉड्स
7.भारतीय मानक समय ग्रीनविच मीन समय से कितना आगे है-5 घण्टे 30 मिनट
8.माउंट एवेरेस्ट किस देश में है-नेपाल
9.भारत की प्राचीनतम पर्वतमाला है- अरावली पर्वत माला
10.विश्व का सबसे बड़ा मंदिर है-कम्बोडिया स्थित अंगकोरवाट का मन्दिर
11.किस देश की संसद में सबसे ज्यादा सदस्य है-चीन
12.चाबल की उन्नत किस्म कौनसी है- पूसा बासमती
13.पौधों को हाईड्रोजन की प्राप्ति किससे होती है- जल से
14.अश्वगंधा और अफीम के पौधों के किन किन भागों से औषधीय महत्व के पदार्थ प्राप्त होते हैं-मूल तथा कच्चे फलों का दूध
15.ध्वनि प्रदूषण को मापने की इकाई है- डेसिबल
16.गोपिसियम किस पौधे का वानस्पतिक नाम है - कपास
17.मधुमख्की पालन के लिए सबसे उपयुक्त समझे जाने वाली प्रजाति है- ए. मेलिफेरा
18.मधुमखियों के छत्ते में पाई जाने वाली मख्कियां कितने प्रकार की होती हैं- तीन
19.रेशम कीट पालन का प्रचलन सर्वप्रथम किस देश से माना जाता है- चीन
20.मछली पालन में प्रमुख रूप से प्राप्त किया जाता है-भोजन
21.किस जलीय जीव से विटामिन युक्त तेल प्राप्त किया जाता है- मछली से
22.जीव के जीवन का आधार क्या होता है- आनुवांशिक पदार्थ
23.प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान स्थित है- नई दिल्ली
24.भारत में प्रथम परखनली शिशु का जन्म किस वर्ष हुआ- 1986 में
25.पादप ऊतक का वह अंग जिसे उसके मूलस्तगां से अलग किया जाता है कहलाता है- कर्तोतक
26.जैव प्रौद्योगिकी शब्द किस वैज्ञानिक ने दिया- कार्ल इरेकि
27.प्रतिजैविक पेंसिलीन किस्से बनाई जाती है- पेन्सिलियम नोटेटम से
28.भेड के किलोंन डौली बनाने में सफलता किस वैज्ञानिक ने अर्जित की- इयान बिलमुट
29.जीवाणुओं में उपस्थित उपरोक्त वर्तुल DNA को क्या कहते हैं-प्लाजमिड
30.प्रकृति में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है- सूर्य
31.ग्रीन हाउस प्रभाव किस गैस की वायुमंडल में सांध्रता बढ़ने पर होता है_CO2 गैस
32. प्रकृति में जैविक क्रियाओं हेतु उपलब्ध जल की मात्रा है-1%
33.एक जीन एक एंजाइम संकल्पना दी- बीडल और टेटम ने
34.जीन और जेनेटिक्स शब्दों का उपयोग सर्वप्रथम किया- जोहानसन और वाटसन ने
35.चिश्ती सिलसिले की स्थापना किस सूफी संत ने की- ख्वाजा अबू अब्दास चिश्ती ने
36.वर्ल्ड वाइड फण्ड फॉर नेचर नामक संस्था किसके प्रति समर्पित है- पर्यावरण के प्रति
37.विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद है- इमाम रेजा मस्जिद (ईरान)
38.computer शब्दकोश में CD शब्द का प्रयोफ किसके लिए किया जाता है- कॉम्पेक्ट डिस्क
39.कान्हड़देव प्रबंध के रचेता हैं--पद्मनाथ
40.संत कबीर की समाधी है--मगहर में
41.भारत में प्रथम ब्रिटिश गवर्नर जनरल कौन था--वारेन हेस्टिंग्स
42.वह पुर्तगाली नागरिक जो 1498 में पहली बार केरल के कालीकट बन्दरगाह पर उतरा और पहली बार भारत के सामुद्रिक मार्ग की खोज की- वास्कोडिगामा
43.तम्बाकू की खेती,जहाज निर्माण,प्रिंटिंग प्रेस आदि की शुरुआत किन लोगों के आगमन पर हुई- पुर्तगालियों के
44.जॉब चारनोक को किस नगर की स्थापना का श्रेय दिया जाता है- कोलकाता
45.सिक्खों के दसमें एवम् अंतिम गुरु जिन्होंने 1699 में गुरुत्व के सिद्धान्त को खत्म कर "खालसा" की स्थापना की- गुरु गोविन्द सिंह
46.आधुनिक भारत का पिता/जन्मदाता एवम् भारतीय पुनर्जागरण का मसीह माना जाता है- राजा राम मोहन राय को
47.भारत और चीन के बीच रेखा है- मैकमोहन रेखा
48.भारत पाकिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय रेखा है- रेडक्लिफ रेखा
49.पवन की दिशा के समकोण पर बनने वाले बालुका स्तूप को क्या कहते है- अनुप्रस्थ
50.अप्रैल 1853 में पहली रेलवे लाइन मुम्बई से ठाणे तक किसके शासन में बिछवाइ गयी- अंग्रेज गवर्नर डलहौजी