आज से मनरेगा को १० साल पूरे जायेगे। परीक्षा की नजर से यह योजना बहुत चर्चित रही है। लगभग सभी एग्जाम ias pcs के pre , mains और इंटरव्यू में इससे जुडी बातों को अक्सर पूछा जाता है। आज इसके बारे में कुछ पॉइंट्स
प्रश्न कई बार पूछा गया है जो अक्सर लोगो से गलत हो जाता है -
मनरेगा सबके के लिए है या सिर्फ पिछड़े और दलित लोगो के लिए?
उत्तर है सबके लिए जो भी काम करने का इच्छुक हो।
- संसद से यह एक्ट २३ अगस्त २००५ को पारित हुआ था।
- यह योजना २ फ़रवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के बंदावली जिले के अनंतपुर गावं में सबसे पहले लागू की गयी थी।
- jean dreze को इसका नीति निर्माता माना जाता है।
- इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागु किया जाता है।
- इसमें हर परिवार के एक सदस्य को हर साल 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
- इसमें महिलाओं के लिए 33 % आरक्षण का प्रावधान है
- 15 दिन तक रोजगार मिलने पर , बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।
- 2 oct 2009 से इसे mgnrega नाम दिया गया है।
- कार्य की अवधि 07 घंटे और सप्ताह में ६ दिन काम।
- अब तक 3.13 लाख करोड़ रूपये इस योजना में खर्च किया जा चुके है.
प्रश्न कई बार पूछा गया है जो अक्सर लोगो से गलत हो जाता है -
मनरेगा सबके के लिए है या सिर्फ पिछड़े और दलित लोगो के लिए?
उत्तर है सबके लिए जो भी काम करने का इच्छुक हो।
मनरेगा का उद्देश्य -
- ग्रामीण रोजगार ताकि शहरों की तरह कम पलायन हो।
- वित्तीय समावेशन।
- पंचायती राज संस्थाओ की मजबूती।
मनरेगा की खामियां
- अवैध जॉब कार्ड , फर्जी काम के आधार पर धन का घोटाला
- इस योजना में जो भी काम किये गये उनसे कोई आउटपुट न मिल पाना सबसे बड़ी कमी मानी जा सकती है .
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