Saturday, 2 January 2016

About Net Neutrality in hindi

Qus:- नेट न्यूट्रलिटी क्या है? Net Neutrality के मुद्दे क्या हैं? Net Neutrality पर भारत और अमेरिका की व्यवस्थाओं के मध्य तुलना कीजिये।
Ans. - दरअसल नेट न्यूट्रैलिटी, फ्री बेसिक्स, एयरटेल ज़ीरो, फ्लिपकार्ट और सेव द इंटरनेट। ये चंद नाम सुर्खियों में हैं। इसके तहत कुछ एेप्स एक्सेस करने के लिए यूज़र को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता। इसके बजाय कंपनियों से ही सीधे चार्ज लिया जाता हैं। इस योजना का इंटरनेट कम्युनिटी ने विरोध किया है।
✓ Net Neutrality टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल सबसे पहले 2003 में हुआ। तब काेलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिम वू ने कहा था कि इंटरनेट पर जब सरकारें और टेलीकॉम कंपनियां डेटा एक्सेस को लेकर कोई भेदभाव नहीं करेंगी, तब वह Net Neutrality कहलाएगी।
नेट न्यूट्रलिटी क्या है?
1. नेट न्यूट्रलिटी एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें अपेक्षा की जाती है कि यूजर, कंटेंट, साइट, प्लैटफॉर्म, एप्लिकेशन और संचार के तरीकों के आधार पर न तो भेदभाव किया जाए और न ही अलग-अलग शुल्क लिया जाए. दूसरे शब्दों में....
- Net Neutrality यानी अगर आपके पास इंटरनेट प्लान है तो आप हर वेबसाइट पर हर तरह के कंटेंट को एक जैसी स्पीड के साथ एक्सेस कर सकें।
2. इसमें माना ये जाता है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और सरकारें नेट पर सभी डेटा को बराबर तवज्जो दें.... Neutrality के मायने ये भी हैं कि चाहे आपका टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कोई भी हो, अाप एक जैसी ही स्पीड पर हर तरह का डेटा एक्सेस कर सकें।
3. ऐसा न हो कि कोई सर्विस ‘स्लो लेन’(Open ही नहीं हो पाती वेबसाइट) में इसलिए अटक जाए क्योंकि उसके हिसाब से पैसे नहीं दिए गए...... कुल मिलाकर, इंटरनेट पर ऐसी आजादी जिसमें स्पीड या एक्सेस को लेकर किसी तरह की कोई रुकावट न हो।
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तीन मुद्दे हैं Net Neutrality ke ..
1. पहला : आजादी। यानी हर तरह की वेबसाइट या हर तरह का डेटा एक्सेस करने की आजादी हो।
2. दूसरा : इक्वलिटी यानी आप कुछ भी एक्सेस करें, आपको नेट की स्पीड एक जैसी मिले।
3. तीसरा : फ्यूचर, क्योंकि इंटरनेट एक्सेस अब लग्जरी नहीं, बल्कि यूटिलिटी की कैटेगरी में आता है।
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=>भारत में क्या व्यवस्था है?
1.. टेलीकॉम कंपनियां स्काइप और वाइबर के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए अब वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) सेवाओं के लिए कस्टमर से अलग से चार्ज लेना चाहती हैं. इस मसले पर ट्राई जहां डिस्कशन पेपर लाने की तैयारी में है. वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम नेट न्यूट्रलिटी को बरकरार रखना चाहता है.
2. पिछले साल एक मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर ने वीओआईपी यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सेवाओं पर एक जीबी डाटा के इस्तेमाल पर 1,000 रुपये तक चार्ज लेने का ऐलान किया था. जब इसका चौतरफा विरोध होने लगा और टेलीकॉम नियामक संस्था ट्राई ने इस पर डिस्कशन पेपर लाने की बात की तो कंपनी ये प्रस्ताव को वापस ले लिया.
3. टेलीकॉम कंपनियों को स्काइप और वाइबर जैसे एप्स के इस्तेमाल पर ग्राहकों से चार्ज लेने की छूट दी जाए या नहीं, इस पर सरकार के विभागों में ही एक राय नहीं दिखती. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम नेट न्यूट्रलिटी को बरकरार रखना चाहता है, जबकि ट्राई का स्टैंड अलग है.
=>अमेरिका में क्या व्यवस्था है?
1. नये नियम मुताबिक ये सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी कंटेंट को ब्लॉक नहीं किया जाएगा.
2. इंटरनेट को इस आधार पर न बांटा जाए कि पैसा देकर इंटरनेट और मीडिया कंपनियां फास्ट लेन पा लें और बाकी लोगों को मजबूरन स्लो लेन मिले.

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