Saturday, 23 May 2015

Know Shrimad Bhagavad Gita in hindi

श्रीमद्भगवद्गीता :-
श्रीमद्भगवद्‌गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में श्री कृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को सुनाया था। यह महाभारत के भीष्मपर्व के अन्तर्गत दिया गया एक उपनिषद् है। इसमें एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा हुई है। इसमें देह से अतीत आत्मा का निरूपण किया गया है।
गीता पर भाष्य:-
संस्कृत साहित्य की परम्परा में उन ग्रन्थों को भाष्य (शाब्दिक अर्थ - व्याख्या के योग्य), कहते हैं जो दूसरे ग्रन्थों के अर्थ की वृहद व्याख्या या टीका प्रस्तुत करते हैं। भारतीय दार्शनिक परंपरा में किसी भी नये दर्शन को या किसी दर्शन के नये स्वरूप को जड़ जमाने के लिए जिन तीन ग्रन्थों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना पड़ता था (अर्थात् भाष्य लिखकर) उनमें भगवद्गीता भी एक है (अन्य दो हैं- उपनिषद् तथा ब्रह्मसूत्र)। [1] भगवद्गीता पर लिखे गये प्रमुख भाष्य निम्नानुसार हैं-
गीताभाष्य - आदि शंकराचार्य
गीताभाष्य - रामानुज
गूढार्थदीपिका टीका - मधुसूदन सरस्वती
सुबोधिनी टीका - श्रीधर स्वामी
ज्ञानेश्वरी - संत ज्ञानेश्वर (संस्कृत से गीता का मराठी अनुवाद)
गीतारहस्य - बालगंगाधर तिलक
अनासक्ति योग - महात्मा गांधी
Essays on Gita - अरविन्द घोष
ईश्वारार्जुन संवाद- परमहंस योगानन्द
गीता-प्रवचन - विनोबा भावे
गीता तत्व विवेचनी टीका - जयदयाल गोयन्दका
भगवदगीता का सार- स्वामी क्रियानन्द
गीता साधक संजीवनी (टीका)- स्वामी रामसुखदास
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