Monday, 4 April 2016

IAS exam writing style Key points discussed

आइ ए एस मुख्य परीक्षा में लेखन शैली के 
महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा 
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आई ए एस मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उत्तर लेखन के विभिन्न पहलुओं का समग्र ज्ञान आवश्यक है। सिविल सेवा के बदले हुए पाठ्यक्रम में लेखन को लेकर आयोग ज्यादा सक्रिय हो गया है। ऐसे में सभी अभ्यर्थियों को भी इसे पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। आई ए एस मे सफल छात्रों का कहना है कि उनकी रैंकिंग बढिया इसलिए आई क्योंकि मुख्य परीक्षा में उन्हें अच्छे अंक प्राप्त हुए थे। अंग्रेजी माध्यम की अपेक्षा हिन्दी माध्यम में अपनी बातों को प्रभावशाली ढंग से
कहना ज्यादा दुरूह है। क्योंकि अंग्रेजी तुलनात्मक रूप से ज्यादा विकसित भाषा है।
हिन्दी माध्यम से तैयारी करने वालों की भाषा और विषय दोनों पर पकड़ कमजोर होती है।
यही कारण है कि उन्हें अच्छे अंक कम मिलते हैं।हिन्दी माध्यम के ज्यादातर छात्र अग्रेजी और हिन्दी भाषा के पेपर में ही फेल हो जाते हैं। जिस कारण उनकी आगे की एंसर शीट का मूल्यांकन ही नही होता। ये अभ्यर्थी पूरे साल दुनिया भर की चीजों को पढ़ते हैं लेकिन प्रश्नों पर कभी लिखने का अभ्यास नही करते। जिस कारण सारा ज्ञान खोपड़ी में ही पड़ा रहता है उसे बाहर निकलने का रास्ता ही नही मिलता। अचानक जब खबर मिलती है कि पी टी हो गया तो आनन - फानन में फिर गलत दिशा में काम शुरू कर देते हैं। कहा गया है कि जल्दी का काम शैतान का होता है। अंतिम समय में किया गया परिश्रम प्रायः व्यर्थ हो जाता है।
आई ए एस की तैयारी इंटीग्रेटेड ढंग से करना चाहिए। PT, Mains, Interview तीनों एक ही परीक्षा के विभिन्न चरण हैं। बेशक विभिन्न खंडों की तैयारी अलग अलग करो लेकिन
दृष्टिकोण एकीकृत ही रहना चाहिए।
हिन्दी माध्यम से तैयारी करने वाले अधिकांश अभ्यर्थी उत्तर लेखन की बुनियादी बातों से ही परिचित नही होते। परीक्षा में प्रश्न के विभिन्न खंडों को समझने के बजाए सीधे ये लिखने पर ही टूटते हैं। उत्तर लिखने के बाद पता चला कि
प्रश्न में आलोचना करने के लिए कहा था ये
व्याख्या कर बैठे। इन्हें ठीक से पता ही नही होता कि प्रश्नों के अंत में लगे टेल वर्ड का क्या अर्थ होता है। सिर्फ इसी एक शब्द से पूरे प्रश्न का उत्तर बदल जाता है। आजकल प्रश्न सीधे तौर पर नही पूछे जाते हैं वे कई क्षेत्रों से जुड़े रहते हैं। उनके पारस्परिक संबंधों की जानकारी का अभाव आपको भटका सकता है। लिखने से पहले प्रश्न के हर पहलू को ठीक से समझो। उसका एक कच्चा ढांचा बना लो उसके बाद ही लिखो। शीघ्रता करो लेकिन जल्दबाजी नही।
एक परीक्षक किसी उत्तर में क्या खोजता है?
वह किस उत्तर को प्रभावशाली, प्रामाणिक और उत्कृष्ट मानता है? अच्छे उत्तर की कसौटी क्या होती है ? यह जानना बेहद जरूरी है। बोल कर कोई बात बताने की अपेक्षा लिखकर समझाना कठिन होता है। भाषा भावों को प्रदर्शित करने का एक माध्यम
है।भाव तीन तरह से व्यक्त किये जाते हैं - -
--मौखिक रूप से
--लिखित रूप में
---सांकेतिक रूप में
सिर्फ तीन घंटे में 20 - 25 कठिन प्रश्नों को हल करने में दबाव बढ़ जाता है और प्रश्नों के छूटने का डर रहता है। प्रश्न छोड कर नही आना चाहिए। सभी तरह के प्रश्नों को एक ही स्टाइल में नही लिखना चाहिए। क्योंकि हर पेपर की प्रवृत्ति अलग होती है। वैकल्पिक विषयों में प्रायः विशेष प्रश्न पूछे जाते हैं। वहीं
GS और Essay में सामान्य किन्तु विस्तृत।
जो भी उत्तर लिखें प्रश्न की मांग के अनुसार होना चाहिए। बेवजह ज्ञान उडेलने से बचना चाहिए। इससे अंक काटे जा सकते हैं।
अगले पोस्ट में हम तीनों के बारे में अलग तरीके से परिचर्चा करेंगे।
--GS के उत्तर कैसे लिखें?
---Optional के उत्तर कैसे लिखें?
----Essay कैसे लिखें?
क्योंकि तीनों की डिमांड अलग होती है। आप पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को लिख कर अभ्यास करते रहें।
लेकिन यदि विषय पर पकड़ नही है तो लिखने से कुछ नही होगा। इसलिए सही ढंग से पढने, समझने और लिखने तीनों काम एक साथ होने चाहिए। जो कोचिंग वाले टेस्ट सीरीज करवा
रहे हैं वह महज एक छलावा है। क्योंकि बिना विषय की गहन समझ के आप सिर्फ सतही उत्तर लिखेंगे और आयोग को औसत दर्जे के उत्तरों से चिढ़ है।

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