Saturday, 19 March 2016

World History: interesting facts

** विश्व इतिहास : रोचक तथ्य
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-ममी- 
मिश्र के लोग मृत्तकों के शरीर को विशेष मसालों की सहायता से सुरक्षित रखते थे, जिसे 'ममी' कहा जाता था। इसे विशाल पिरामिडों अथवा समाधियों में सुरक्षित रखा जाता था। इसके पीछे मिश्रवासियों का परलोक के प्रति धार्मिक विश्वास था। उनका मानना था कि मनुष्य को जिन वस्तुओं की आवश्यकता इस लोक में होती है उनकी आवश्यकता परलोक में भी होती है। उनका मानना था कि जब तक शव सुरक्षित रहेगा, तब तक वह सुखों का उपभोग करता रहेगा। मिश्र की खुदाईयों में तीन हजार वर्ष पुराने शव भी इतने सुरक्षित निकले हैं कि उन्हें देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि ये शव है। मृत्तक की आत्मा की शान्ति के लिए ताबूत के भीतर की ओर निर्देश रखने का रिवाज था। इन निर्देशों का संग्रह ही 'मृत्तकों की पुस्तक' (पिरामिड टैक्स्ट्स) कहलाया, जो मिश्र के लिखित साहित्य में सबसे अधिक लोकप्रिय है।
-पेपाइरस (पटेरा) - 
यह निचले मिश्र का राजचिन्ह था, जो वहां के दलदल में बहुतायत से उगता था। मिश्री सभ्यता के लिए यह वरदान बन गया था। जहां एक ओर उससे नौकायें बनायी जाती थीं वहीं दूसरी ओर कागज भी तैयार किया जाता था। पटेरा को चीरकर व पानी में भिगोकर और बाद में लुगदी के लेप के बाद पत्थरों के बीच दबाकर कागज बनाया जाता था। पटेरा की ही कलम बनायी जाती थी। पेपीरस का निर्माण प्रथम राजवंश के काल से ही प्रारम्भ हो गया था। यूनानी लोग पेपीरस को 'बाइब्लोस' तथा पेपीरस के एक पत्र को 'बिब्लिओन' कहते थे। कालान्तर में पेपीरस पुस्तक हेतु 'बिब्लिओन' शब्द का प्रयोग होने लगा। मिश्र का प्रमुख उद्योग पेपिरस नाम के पौधे की छाल से कागज बनाना था। अंग्रेजी भाषा का शब्द 'पेपर' इसी पेपिरस से बना है।

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