Tuesday, 22 March 2016

The miracles of science

विज्ञान चमत्कार
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1. जानिए प्याज क्यों रुलाता है सबको?
प्याज में एमीनो एसिड सल्फॉक्साइड और सल्फेनिक एसिड नाम के केमि‍कल होते हैं जो मिलकर प्रोपैनथियॉल एस-ऑक्साइड बनाते हैं. इस कंपाउंड की तीखी भाप के कारण हमारे आंखों में जलन पैदा हो जाती है. हमारी आंखों की एक अच्छी खूबी यह है कि इसमें अगर कोई बाहरी तत्व आ जाता है तो यह आंसू निकालकर उसे धोने का प्रयास करती है.
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2. जानिए मकड़ी खुद अपने जाल में क्यों नहीं चिपकती है?
मकड़ी का पूरा जाल चिपकने वाले नहीं होता है. वह इसका कुछ ही हिस्सा चिपचिपा बुनती है. वहीं, इसके अलावा वैसा हिस्सा जहां मकड़ी खुद आराम से रहती है, वह बिना चिपचिपे पदार्थ के बनाया जाता है. इसलिए वह आसानी से इसमें घूम लेती है. वैसे अपने ही जाल में फंसने से बचने के लिए मकड़ी एक और तरकीब निकालती है. वह रोजाना अपने पैर काफी अच्छे से साफ करती है ताकि इन पर लगी धूल और दूसरे कण निकल जाएं.
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि मकड़ी का पैर तैलीय होता है इसलिए वह जाल में नहीं फंसती और इसमें घूमती रहती है. लेकिन सच यह है कि मकड़ियों के पास ऑयल ग्लैंड्स (ग्रंथि‍यां) नहीं होते हैं. वहीं कुछ वैज्ञानिक इसकी वजह मकड़ी की टांगों पर मौजूद बालों को मानते हैं जिन पर जाले की चिपचिपाहट का कोई असर नहीं होता है.
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3. कुछ जानवरों की आंखें रात में क्यों चमकती हैं?
जिन जानवरों की आंखें चमकती है, उनकी आंखों में एक विशेष प्रकार के मणिभीय पदार्थ (Crystalline Sbstance) की पतली परत होती है. यह पतली परत आंखों पर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित कर देती है. यह ठीक उसी तरह की क्रिया है, जैसे किसी दर्पण पर सूर्य की किरण पड़ते ही चमकने लगती है.
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4. जानिए फिल्मों में कभी-कभी कार के पहिए पीछे जाते क्यों दिखते हैं?
आंखो को दिखने वाले इस प्रभाव को समझने के लिए हमें अपनी आंखों और चलचित्र के सिद्धान्त को समझना होगा. आपको बता दें कि हमारी आंखें सोलह चित्रों को देखकर इसमें अंतर कर सकती है. अगर सोलह से अधिक चित्र एक क्रम में और एक साथ आंखों के आगे से गुजरे, तब हमारी आंख उन चित्रों को अलग-अलग पहचान पाने में कामयाब नहीं हो पाती.
वहीं बात पर्दे (स्क्रीन) की करें तो यहां दिखाई जाने वाली फिल्म के चित्र अलग-अलग होते हैं, लेकिन आंखों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए इन्हें इतनी तीव्र गति से घुमाया जाता है कि एक सेकेंड में सोलह से अधिक चित्र आंखों के आगे से घूम जाएं, जिससे हमें ये सारे चित्र अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही लगे.
आमतौर पर एक सेकेंड में स्क्रीन पर 32 चित्र दिखाए जाते हैं और वे एक के बाद एक इतनी तीव्र गति से आते हैं कि आप उन चित्रों को अलग-अलग नहीं देख सकते, इसलिए इन्हें चलता हुआ अनुभव करते हैं. आधुनिक फिल्मों को शूट करते समय एक सेकेंड में 24 फ्रेम शूट किए जाते हैं.

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