आज का इतिहास-1
(23 अगस्त)
** 23 अगस्त सन 1762 ईसवी को फ़्रांस के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार आंद्रे शनीये का जन्म हुआ।
** 23 अगस्त सन 1866 ईसवी को प्राग का ऐतिहसिक समझौता हुआ। इस समझौते पर प्रॉग और आँस्ट्रिया ने हस्ताक्षर किये जिसके अंतर्गत जर्मनी संघ जिसकी अध्यक्षता आँस्ट्रिया का कुछ भाग जर्मनी के अधिकार में चला गया।
** 23 अगस्त सन 1936 ईसवी को नाज़ी जर्मनी और सोवियत संघ के मध्य अतिक्रमण न करने का एक समझौता हुआ। उस समय जर्मनी में हिटलर और सोवियत संघ में स्टालिन सत्तासीन थे। इस समझौते के आधार पर दोनों देशों ने एक दूसरे पर आक्रमण न करने का वचन दिया था किंतु वर्ष 1941 में सोवियत संघ पर जर्मनी के आक्रमण के साथ ही यह समझौता समाप्त हो गया।
** 23 अगस्त सन 1942 ईसवी को स्टलिन्ग्रेड युद्ध की सबसे भयावह लड़ाई सोवियत संघ और जर्मनी के मध्य हुई। एक ही दिन में दोनों ओर से 40 हज़ार सैनिक मारे गये। युद्ध इस लिए भी अत्यंत भयानक हो गया था क्योंकि हिटलर ने स्टालिनग्रेड नगर पर किसी भी स्थिति में अधिकार करने का आदेश दिया था। नाज़ी सेना ने यह आदेश पाकर स्टालिनग्रेड पर भयंकर आक्रमण किया किंतु नगरवासियों पर आधारित सोवियत संघ की सेना के कड़े प्रतिरोध के कारण नाज़ी सेना को सफलता नहीं मिल सकी।
(23 अगस्त)
** 23 अगस्त सन 1762 ईसवी को फ़्रांस के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार आंद्रे शनीये का जन्म हुआ।
** 23 अगस्त सन 1866 ईसवी को प्राग का ऐतिहसिक समझौता हुआ। इस समझौते पर प्रॉग और आँस्ट्रिया ने हस्ताक्षर किये जिसके अंतर्गत जर्मनी संघ जिसकी अध्यक्षता आँस्ट्रिया का कुछ भाग जर्मनी के अधिकार में चला गया।
** 23 अगस्त सन 1936 ईसवी को नाज़ी जर्मनी और सोवियत संघ के मध्य अतिक्रमण न करने का एक समझौता हुआ। उस समय जर्मनी में हिटलर और सोवियत संघ में स्टालिन सत्तासीन थे। इस समझौते के आधार पर दोनों देशों ने एक दूसरे पर आक्रमण न करने का वचन दिया था किंतु वर्ष 1941 में सोवियत संघ पर जर्मनी के आक्रमण के साथ ही यह समझौता समाप्त हो गया।
** 23 अगस्त सन 1942 ईसवी को स्टलिन्ग्रेड युद्ध की सबसे भयावह लड़ाई सोवियत संघ और जर्मनी के मध्य हुई। एक ही दिन में दोनों ओर से 40 हज़ार सैनिक मारे गये। युद्ध इस लिए भी अत्यंत भयानक हो गया था क्योंकि हिटलर ने स्टालिनग्रेड नगर पर किसी भी स्थिति में अधिकार करने का आदेश दिया था। नाज़ी सेना ने यह आदेश पाकर स्टालिनग्रेड पर भयंकर आक्रमण किया किंतु नगरवासियों पर आधारित सोवियत संघ की सेना के कड़े प्रतिरोध के कारण नाज़ी सेना को सफलता नहीं मिल सकी।
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