करेंट अफेयर्स
डीजल रेल इंजन बनाने के लिए भारत-अमेरिका संयुक्त उद्यम
भारतीय रेलवे ने बिहार के सारण जिले में स्थित मारहोवरा में डीजल आधारित कारखाना स्थापित करने के लिए मैसर्स जीई ग्लोबल रिसोर्सिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अनुबंध पत्र जारी किया है। रेल मंत्रालय और मैसर्स जीई ग्लोबल सोर्सिंग इंडिया प्राइवेट अब एक संयुक्त उद्यम कंपनी के रूप में काम करेगी।
प्रमुख बिंदु
2006-07 में इस परियोजना की घोषणा की गई थी और इसमें संयुक्त उपक्रम का चयन किया गया।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के लिए 4500 हॉर्स पॉवर (एचपी) और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल चालित इंजनों की आपूर्ति करेगी।
संयुक्त कंपनी मारहोवरा में इसके लिए कारखाने का निर्माण और उसका संचालन करेगी।
रेल मंत्रालय अधिकतम 100 करोड़ रुपये की राशि के साथ 26 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी।
226 एकड़ जमीन भूमि में 1000 करोड़ की लागत से अगले तीन साल की अवधि में इस कारखाने के स्थापित होने की संभावना है।
यह कंपनी 10 वर्षों तक प्रतिवर्ष 100 लोकोमोटिव्स का निर्माण करेगी।
इन 1000 मालवाहक वाले लोकोमोटिव की मूल लागत लगभग 14,656 करोड़ रुपए होगी।
यह कंपनी लोकोमोटिव्स का 13 वर्षों तक रखरखाव करेगी। इसके बाद, भारतीय रेलवे इन लोकोमोटिव्स का रखरखाव करेगी।
इन लोकोमोटिव्स में नवीनतम प्रौद्योगिकी जैसे इलैक्ट्रोनिक फ्यूल इंजेक्शन प्रणाली, मोटरचालित ब्लोअर और कम्प्रेशर, सौर नियंत्रण प्रणालियां लगी होंगी।
ये उच्च तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल लोकोमोटिव्स यूआईसी 624 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होंगे।
पीपीपी व्यवस्था के तहत, भारतीय रेल को आगे लाभ लाने के लिए कंपनी द्वारा प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
इससे आगामी डेडिकेटिड मालभाड़ा कॉरिडोर के लिए मदद मिलेगी। भविष्य में, इन लोकोमोटिव्स का यात्री संस्करण भी निर्मित किया जा सकता है। इस कारखाने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और आसपास के क्षेत्र में सहायक उत्पादन उद्योगों और मददगार उद्योग के विकास में मदद मिलेगी। ऐसे क्षेत्र आर्थिक रूप से कम विकसित है और इनमें अधिक निवेश और रोजगार सृजन की जरूरत है।
डीजल रेल इंजन बनाने के लिए भारत-अमेरिका संयुक्त उद्यम
भारतीय रेलवे ने बिहार के सारण जिले में स्थित मारहोवरा में डीजल आधारित कारखाना स्थापित करने के लिए मैसर्स जीई ग्लोबल रिसोर्सिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अनुबंध पत्र जारी किया है। रेल मंत्रालय और मैसर्स जीई ग्लोबल सोर्सिंग इंडिया प्राइवेट अब एक संयुक्त उद्यम कंपनी के रूप में काम करेगी।
प्रमुख बिंदु
2006-07 में इस परियोजना की घोषणा की गई थी और इसमें संयुक्त उपक्रम का चयन किया गया।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के लिए 4500 हॉर्स पॉवर (एचपी) और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल चालित इंजनों की आपूर्ति करेगी।
संयुक्त कंपनी मारहोवरा में इसके लिए कारखाने का निर्माण और उसका संचालन करेगी।
रेल मंत्रालय अधिकतम 100 करोड़ रुपये की राशि के साथ 26 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी।
226 एकड़ जमीन भूमि में 1000 करोड़ की लागत से अगले तीन साल की अवधि में इस कारखाने के स्थापित होने की संभावना है।
यह कंपनी 10 वर्षों तक प्रतिवर्ष 100 लोकोमोटिव्स का निर्माण करेगी।
इन 1000 मालवाहक वाले लोकोमोटिव की मूल लागत लगभग 14,656 करोड़ रुपए होगी।
यह कंपनी लोकोमोटिव्स का 13 वर्षों तक रखरखाव करेगी। इसके बाद, भारतीय रेलवे इन लोकोमोटिव्स का रखरखाव करेगी।
इन लोकोमोटिव्स में नवीनतम प्रौद्योगिकी जैसे इलैक्ट्रोनिक फ्यूल इंजेक्शन प्रणाली, मोटरचालित ब्लोअर और कम्प्रेशर, सौर नियंत्रण प्रणालियां लगी होंगी।
ये उच्च तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल लोकोमोटिव्स यूआईसी 624 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होंगे।
पीपीपी व्यवस्था के तहत, भारतीय रेल को आगे लाभ लाने के लिए कंपनी द्वारा प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
इससे आगामी डेडिकेटिड मालभाड़ा कॉरिडोर के लिए मदद मिलेगी। भविष्य में, इन लोकोमोटिव्स का यात्री संस्करण भी निर्मित किया जा सकता है। इस कारखाने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और आसपास के क्षेत्र में सहायक उत्पादन उद्योगों और मददगार उद्योग के विकास में मदद मिलेगी। ऐसे क्षेत्र आर्थिक रूप से कम विकसित है और इनमें अधिक निवेश और रोजगार सृजन की जरूरत है।
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