Wednesday, 7 October 2015

Sher Shah (L540-l545i 0) (History)

शेरशाह(1540-1545ई0)
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01.सूर सम्राज्य का संस्थापक अफगान वंशीय शेरशाह सूरी था ।

02.शेरशाह का जन्म 1472 ई0 में बजवाड़ा (होशियारपुर) में हुआ था ।

03.इसके बचपन का नाम फरीद खाँ था । यह सूर वंश से सम्बंधित था ।

04.इनके पिता हसन खाँ जौनपुर राज्य के अन्तर्गत सासाराम के जमींदार थे ।


05.फरीद ने एक शेर को तलवार के एक ही वार से मार दिया था।उसकी इस बहादुरी से प्रशन्न होकर बिहार के अफगान शासक सुल्तान मुहम्मद बहार खाँ लोहानी ने उसे शेर खाँ की उपाधि प्रदान की ।

06.शेरशाह बिलग्राम युद्ध (1540 ई0) के बाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा ।

07.शेरशाह की मृत्यु कालिंजर के किले को जीतने के क्रम में 22 मई ,1545 ई0 को हो गयी ।मृत्यु के समय वह उक्का नामक आग्नेयास्त्र चला रहा था ।

08.शेरशाह का मकबरा सासाराम में है ।

09.रोहतासगढ़ किला , किला-ए-कुहना (दिल्ली) नामक मस्जिद का निर्माण शेरशाह के द्वारा किया गया था।

10.शेरशाह ने भूमि माप के लिए 32 अंकवाला सिकन्दरी गज एवम् सन की डंडी का प्रयोग किया ।

11.शेरशाह ने रोहतासगढ़ के दुर्ग एवम् कन्नौज के स्थान पर शेरसूर नामक नगर बसाया ।

12.कबूलियत एवम् पट्टा प्रथा की शुरुयात शेरशाह ने की ।

13.शेरशाह ने 1541 ई0 में पाटलिपुत्र को पटना के नाम से पुनः स्थापित किया ।।

14.शेरशाह ने ग्रैंड ट्रक रोड की मरम्मत करवाई।

15.मलिक मुहम्मद जायसी शेरशाह के समकालीन थे ।

16.डाक -प्रथा का प्रचलन शेरशाह के द्वारा किया गया।

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