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भारत के राष्ट्रगान को कनाडा के रेसलर लेजेंड ने नहीं दिया था सम्मान
ब्यूरो / अमर उजाला, रोहतक
भारत के कॉमनवेल्थ रेसलिंग हैवीवेट चैंपियन संग्राम सिंह (जाट) की मुकाबले से पहले ही अपने प्रतिद्वंद्वी जो लेजेंड से राष्ट्रगान के अपमान पर तीखी झड़प हो गई थी।
और उसी समय उन्होंने इस अपमान के लिए लेजेंड को धूल चटाने का फैसला कर लिया। हुआ भी कुछ ऐसा ही। दक्षिण अफ्रीका से मुंबई पहुंचे संग्राम ने फोन पर इस बारे में अमर उजाला से खुलकर बात की।
संग्राम ने कहा, मैच से पहले दोनों देशों का राष्ट्रगान बजाया गया था। पहले कनाडा का राष्ट्रगान बजा। उस समय मैंने उसे पूरा सम्मान दिया और मैं अपनी जगह पर खड़ा हो गया।
लेकिन जब भारतीय राष्ट्रगान बजा तो लेजेंड खड़े नहीं हुए। इस पर मैंने एतराज जताया तो जो लेजेंड बहस पर उतारू हो गए।
तभी मैंने सोचा कि मौत के रिंग लेजेंड से मैं इस अपमान का बदला लेकर रहूंगा। जीत का अनुभव साझा करते हुए संग्राम ने कहा कि� शुरुआत में मैंने कुछ वार किए लेकिन लेजेंड के अनुभव के सामने एक न चल सकी। लेजेंड मुझ पर हावी रहा। एक समय तो ऐसा आया जब उसने दबोच लिया और मुझे लगा कि मेरी जान मुश्किल में है। तभी मैंने हिम्मत से काम लिया और मौका मिलने ही लेेजेंड की नाक में जबरदस्त पंच जड़ दिया। फिर क्या था वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। पंच इतना तेज था कि लेजेंड उठ नहीं सका और मैंने अपना पंच जारी रखा। तभी नॉक राउंड मुकाबले में टेन काउंटिंग में लेजेंड के न उठने पर मुझे विजेता घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा, विजेता घोषित होते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने सोचा कि देश के अपमान का बदला मैंने लेजेंड से ले लिया है।
पायल के साथ आएंगे रोहतक
संग्राम ने बताया कि इस माह के अंत में या अगले माह की शुरुआत में रोहतक आएंगे। इस बार उनके साथ मंगेतर पायल रोहतगी भी रोहतक आएंगी। पायल से शादी के सवाल को उन्होंने हंसकर टाल दिया।
रिंग में मौत या जिंदगी नहीं, बेल्ट की चमक और तिरंगा रहा याद
मदीना के माटी से दुनियां में चमकने वाले संग्राम सिंह ने बताया कि जब वह रिंग उतरा तो सामने लटकी एक चमकीली बेल्ट और उस पर छह देशों के फ्लैग के बीच अपना तिरंगा दिख रहा था। बस रिंग में बेल्ट और बेल्ट में लगा तिरंगा हासिल करना याद रहा। ये तो देशवासियों की दुआएं थी कि मैं जीता। संग्राम ने बताया कि बेल्ट की कीमत करीब 50 लाख के आस-पास है। रही बात रेसलिंग में जीत के पैसों की, तो मामूली रेसलिंग में 20 से 50 लाख मिल जाते हैें, ये तो कॉमनवेल्थ हैवीवेट रेसलिंग चैंपियनशिप थी।
गरीब व जरूरतमंद बच्चों के लिए उतरा मौत के रिंग में
संग्राम ने बताया कि मैंने केवल फेमस होने के लिए इस प्रोफेशनल रेसलिंग में भाग नहीं लिया बल्कि मैं एक्सपायरी स्पोर्ट्स पर्सन नहीं बनना चाहता था। उन्होंने बताया कि करीब साढ़े तीन साल पहले एक फाइट में मुझे चोटें आईं थी। इसके बाद से फाइट नहीं लड़ी। मैंने कई जरूरतमंद बच्चों को देखा, जो पैसे के अभाव में अपना सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद मैंने एक्सपायरी स्पोर्ट्स पर्सन न बनते हुए प्रोफेशनल रेसलिंग करने का निर्णय लिया। ताकि जीत के पैसों से इन बच्चों का सपना पूरा कर सकूं। वैसे भी मैंने महाराष्ट्र के एक गांव के स्कूल को गोद लिया है। वहां के बच्चे अब मेरी जिम्मेदारी हैं।
गांव के लोगों ने दूध और घी दिया, मैंने उन्हें जीत दी
श्रेय और सहयोग के सवाल पर संग्राम ने बताया कि रिंग में जाने के मेेरे फैसले पर परिजनों ने मेरा साथ दिया। गांव के लोगों ने आर्शीवाद दिया। जब मैं खेलता था तो गांव के लोगों ने मुझे घी दिया, दूध दिया। इसलिए मैंने भी उन्हें ये जीत दी।
बॉलीवुड नहीं कुश्ती है मेरी पहचान
जरूरतमंद बच्चों और खिलाड़ियों के लिए मौत के इस रिंग से बेहतर बॉलीवुड में अभिनय के जरिए पैसे जुटाने के लिए पूछने पर संग्राम ने बताया कि कुश्ती मेरी पहचान है। जबकि बॉलीवुड महज शौक। दोनों में बैलंस है। अगर मैं खुद इस क्षेत्र में आगे नहीं बढूंगा तो दूसरों की मदद कैसे कर पाऊंगा। संग्राम ने बताया कि तीन-चार साल तक प्रोफेशनल रेसलिंग जारी रखने का इरादा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही लीड रोल वाली एक मूवी की शूटिंग है। इसके अलावा और मूवी और कुछ एड फिल्म है। �
मैं राजनीति नहीं सुधार चाहता हूं
संग्राम ने बताया कि प्रदेश और रोहतक में खेल के पर्याप्त संसाधन है और जो जरूरतमंद हैं उन्हें मैं आगे भी पूरा करता रहूंगा। अगर सरकार या फिर कोई खिलाड़ी मुझसे मदद चाहता है तो मैं जरूर आगे आऊंगा। बस मुझे राजनीति नहीं सुधार चाहता हूं।

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